Sansar Daily Current Affairs, 18 August 2018
GS Paper 1 Source: The Hindu
Topic : 11th World Hindi Conference
संदर्भ
मॉरिशस में 11वाँ विश्व हिंदी सम्मलेन आयोजित किया जा रहा है. इसकी थीम है “वैश्विक हिंदी और भारतीय संस्कृति”.
विश्व हिंदी सम्मलेन क्या है?
विश्व हिंदी सम्मलेन हिंदी भाषा को समर्पित एक सम्मलेन है जो तीन वर्ष में एक बार आयोजित किया जाता है. इसमें विश्व के विभिन्न भागों से ऐसे हिंदी के विद्वान् लेखक और पुरस्कार विजेता सम्मिलित होते हैं जिन्होंने इस भाषा के प्रति योगदान किया है.
मुख्य तथ्य
- 10वाँ विश्व हिंदी सम्मलेन भोपाल में सितम्बर 2015 में हुआ था. उस सम्मलेन में यह निर्णय लिया गया था कि अगला सम्मेलन अर्थात् 11वाँ सम्मलेन मॉरिशस में आयोजित किया जाएगा.
- प्रथम विश्व हिंदी सम्मलेन 1975 में भारत के नागपुर में हुआ था. तब से अभी तक विश्व के अलग-अलग भागों में इस प्रकार के 10 सम्मलेन आयोजित हो चुके हैं.
- विदेश मंत्रालय ने मॉरिशस में विश्व हिंदी सचिवालय स्थापित कर रखा है. इस सचिवालय का मुख्य उद्देश्य हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में बढ़ावा देने और इसे संयुक्त राष्ट्र संघ की एक आधिकारिक भाषा के रूप में पहचान दिलाने के लिए कार्य करना है.
GS Paper 2 Source: The Hindu
Topic : Prompt Corrective Action (PCA) framework
संदर्भ
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कहा गया है कि वे 2018 के अंत-अंत तक त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (Prompt Corrective Action – PCA) की व्यवस्था कर लें. वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र में 21 बैंक हैं जिनमें से 11 भारतीय रिज़र्व बैंक की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई व्यवस्था के दायरे में आ चुके हैं.
पृष्ठभूमि
त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई की व्यवस्था बैंकों के द्वारा दिए गये फंसे हुए कर्ज (bad loans) के सन्दर्भ में की गई है और इसका उद्देश्य कर्ज में दी गई राशि की वसूली को बढ़ाना है. ज्ञातव्य है कि ऐसे ही एक कार्रवाई भारत सरकार द्वारा इन्सोल्वेन्सी और बैंकरप्टसी कोड (Insolvency and Bankruptcy Code – IBC) के रुप में की गई है जिसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं.
PCA Framework क्या है?
PCA का फुल फॉर्म है – Prompt Corrective Action. बैंकों के 2017-18 के वित्तीय नतीजे आने के बाद इन बैंकों की परिसंपत्तियों के पुनर्गठन के लिए सरकार ने एक समिति का गठन किया था. इसके अलावा बढ़ते घाटे और डूबते कर्ज की वजह से सार्वजनिक क्षेत्र के 21 में से 11 बैंक PCA के दायरे में है.
इस फ्रेमवर्क के दायरे में आने के बाद —->
- ये बैंक शाखा विस्तार नहीं कर सकते.
- RBI इनको लाभांश भुगतान (dividend payment) करने से रोक सकता है.
- इन बैंकों द्वारा लोन देने पर भी RBI के द्वारा कई शर्तें लगाई जा सकती हैं.
- RBI इन बैंकों के एकीकरण, पुनर्गठन और बंद करने की कार्रवाई कर सकता है.
- RBI इन बैंकों के प्रबंधन के मुआवजे और निदेशकों के फीस पर प्रतिबंध लगा सकता है.
त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई फ्रेमवर्क (PCA Framework) के उपबंध 1 अप्रैल, 2017 को लागू किये गये थे. लागू होने के तीन वर्ष बाद इस फ्रेमवर्क की समीक्षा होनी है.
PCA कब लागू की जाती है?
किसी भी बैंक पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई की व्यवस्था तब लागू की जाती है जब उसका डूबा हुआ कुल ऋण 12% से अधिक हो जाता है और उसके चार लगातार वर्षों की परिसंपत्तियों (assets) पर नकारात्मक प्रतिलाभ (return) मिलने लगता है.
PCA के अन्दर आने वाले बैंकों पर लागू होने वाले प्रतिबंध
त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई आरम्भ हो जाने के बाद बैंक बड़े-बड़े जमा का नवीकरण अथवा उपयोग नहीं कर पाता है. साथ ही उसे शुल्क-आधारित आय को बढ़ाने से रोक दिया जाता है. बैंकों को फँसे हुए अपने NPA घटाने तथा नए NPA (<< NPA के बारे में पढ़ें) पैदा होने से रोकने के लिए विशेष अभियान चलाना पड़ता है. यही नहीं बैंक को नए व्यवसाय शुरू करने की अनुमति भी नहीं दी जाती है. भारतीय रिज़र्व बैंक बैंकों को बैंक बाजार से उधारी लेने पर प्रतिबंध लगा देता है.
इसके बारे में हमने Sansar Editorial में डिटेल आर्टिकल लिखा है, उसको पढ़ लें > भारत में बैंक विलय और अधिग्रहण का इतिहास
GS Paper 2 Source: The Hindu
Topic : Caspian Sea Agreement
संदर्भ
बहुत दिनों से कैस्पियन या कश्यप सागर और उसके समीपवर्ती क्षेत्रों का प्रबंधन कैसे किया जाए, इस विषय में इस सागर के तटवर्ती देशों, यथा – रूस, अजरबैजान, ईरान, कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के बीच वार्ता चल रही थी. अंततः इन देशों ने अक्ताऊ शिखर सम्मलेन में इस विषय में एक वैध संधि पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.
कैस्पियन सागर का महत्त्व
कैस्पियन सागर एक विशाल जलाशय है जो अपने भौगोलिक स्थिति और संसाधनों के कारण बड़ा रणनीतिक महत्त्व रखता है. यह यूरोप और एशिया के बीच में स्थित है और ऐतिहासिक रूप से पूर्वी और पश्चिमी शक्तियों के मध्य में एक मुख्य व्यापारिक गलियारे (trade corridor) के रूप में जाना जाता रहा है. कैस्पियन सागर का महत्त्व आधुनिक युग में तब से और भी बढ़ गया है जब से वहाँ 50 बिलियन बैरल से भी अधिक खनिज तेल और 9 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस के भंडारों का पता चला है.
कैस्पियन सागर के प्रबंधन की आवश्यकता क्यों है?
उल्लेखनीय है कि 1991 के पहले यह क्षेत्र सोवियत संघ के अन्दर आता था और इसलिए यह मास्को के सम्पूर्ण नियंत्रण के अधीन था. लेकिन 1991 के बाद सोवियत संघ के भंग होने के कारण इस क्षेत्र में कई नए-नए देश उत्पन्न हो गए. इसलिए कैस्पियन सागर के संसाधनों के उपयोग को लेकर आपस में विवाद खड़े हो गये.
आज की तिथि में कैस्पियन सागर के चारों ओर के देश अपनी-अपनी तटरेखा के आस-पास उपलब्ध ऊर्जा संसाधन का दोहन कर रहे हैं, परन्तु इस समुद्र के आंतरिक भागों तक वे पहुँच नहीं पाते हैं. इस कारण बहुत-सी ऐसी पाइपलाइन परियोजनाएँ रुकी पड़ी हैं जिनमें कैस्पियन सागर के आर-पार जाना आवश्यक है.
कैस्पियन सागर संधि के प्रावधान
हाल ही में इस संधि के अनुसार कश्यप सागर को एक झील न मानते हुए एक सागर ही माना गया है. इसका अभिप्राय यह है कि इसके तटवर्ती देश अपनी तटरेखा से 15 समुद्री मील तक के स्वामी स्वयं होंगे और खनिज का दोहन कर सकेंगे. साथ ही वे 25 समुद्री मील तक मछली मारने का काम भी कर सकेंगे.
कश्यप सागर का बाकी जल सब देशों के लिए समान रूप से उपभोग का विषय होगा. संधि में यह भी प्रावधान किया गया है कि किसी गैर कैस्पियन-सागरीय देश के सैन्य जहाज इसमें प्रवेश नहीं कर सकते.
GS Paper 3 Source: PIB
Topic : International Conference on Recent Advances in Food Processing Technology (iCRAFPT)
संदर्भ
खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी से सम्बंधित हाल में हुई प्रगति के विषय में अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन (iCRAFPT), 2018 तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित भारतीय खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Food Processing Technology) में आयोजित हो रहा है.
इसकी theme है – “खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से कृषकों की आय को दुगुना करना”/ “Doubling farmers’ income through food processing”.
सम्मलेन का महत्त्व
तीन दिन चलने वाले इस सम्मलेन में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के वैज्ञानिक एवं विद्वान् आयेंगे और खाद्य इंजीनियरिंग और उसके औद्योगिक अनुप्रयोग, खाद्य उत्पाद विकास, खाद्य जैव तकनीक और सूक्ष्म भोजन (nano foods) के विषय में किये गये अपने-अपने शोध से सम्बंधित अनुभवों के बारे में एक-दूसरे को बतलायेंगे.
खाद्य प्रसंस्करण प्रक्षेत्र की महत्ता
ज्ञातव्य है कि सभी कृषि उत्पाद ज्यों का त्यों उपभोग करने योग्य नहीं होते. उदाहरण के लिए गेहूँ को आटा बनाना पड़ता है, धान को चावल बनाना पड़ता है, ईख से गुड़-चीनी-एथनोल-अल्कोहल आदि निकालते हैं. इस प्रकार बनाए गए उत्पाद को हम आगे भी प्रसंस्करण करते हैं, जैसे – आटे को रोटी बनाते हैं. इसके अतिरिक्त फसल के बचे-खुचे अंश, जैसे – पुआल से भी हम नए उपयोगी उत्पाद बनाते हैं, उदाहरणार्थ – चावल के भूसे का तेल, चारा आदि. गन्ने की खोई से बिजली भी बनाई जा सकती है. इस प्रकार हम पाते हैं कि खाद्य प्रसंस्करण बहुत ही महत्त्वपूर्ण वस्तु होती है.
भारत का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग (food processing industry) एक ऐसा उद्योग है जो अनुमानतः 135 मिलियन डॉलर का है और यह प्रतिवर्ष प्रायः 8% के दर से बढ़ रहा है. दूसरी ओर कृषि वृद्धि की दर इससे आधी है अथवा 4% है. इससे पता चलता है कि भारत तेजी से खाद्य प्रसंस्करण को अपनाता जा रहा है. भारत का बढ़ता हुआ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग यहाँ की रोजगार की समस्या को दूर करने में सहायक हो सकता है. अभी इसमें 3% रोजगार लगे हुए हैं जबकि विकसित देशों में 14% की जनसंख्या इस उद्योग से जुड़ी हुई है.
चुनौतियाँ
- भारत के कृषि बाजार की आपूर्ति श्रृंखला दीर्घ एवं खंडित है.
- कृषि उत्पादों के लिए उपयुक्त खलिहान और भंडार नहीं होने के कारण उत्पादों का 30% भाग निर्यात के लिए बंदरगाह और हवाई अड्डे आते-आते तक नष्ट हो जाता है.
- कुशल श्रम शक्ति का अभाव
- गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन नहीं होना.
GS Paper 3 Source: The Hindu
Topic : Participatory notes
संदर्भ
SEBI (Securities and Exchange Board of India) द्वारा सहभागी नोटों (Participatory notes – P Notes) के दुरूपयोग को रोकने के लिए लागू किये गये कठोर उपायों के कारण भारत के पूँजी बाजार में सहभागी नोटों के माध्यम से निवेश पिछले जुलाई में 80,341 करोड़. रु. तक सिमट गया जोकि पिछले 9 वर्षों में सबसे कम है.
पृष्ठभूमि
ज्ञातव्य है कि SEBI ने सहभागी नोटों के दुरूपयोग को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय किये हैं –
- जुलाई 2017 में प्रत्येक सहभागी नोट (P-Note) पर 1,000 डॉलर का शुल्क लगा दिया गया जिससे इनका दुरूपयोग काला धन भेजने में नहीं किया जा सके.
- गत वर्ष अप्रैल में ही SEBI ने देश में रहने वाले भारतीयों, प्रवासी भारतीयों तथा उनके स्वामित्व वाली इकाइयों को सहभागी नोट के जरिये निवेश करने से रोक दिया था.
सहभागी नोट क्या हैं?
इन नोटों का उपयोग विदेशी बाजार में भाग लेने वाले वे व्यक्ति करते हैं जो विदेशी संस्थागत निवेशक (Foreign Institutional Investor -FII) के रूप में पंजीकृत होना नहीं चाहते हैं. ये नोट भारत में निर्गत नहीं होते हैं अपितु भारत में पंजीकृत FII इन्हें विदेशी निवेशकों को निर्गत करते हैं. विदेशी ग्राहकों की ओर से भारत में पंजीकृत FII शेयर बाजार में लेन-देन शुरू करते हैं. उसके पश्चात् वे विदेश में स्थित ग्राहक को P-Notes निर्गत कर देते हैं. इस प्रकार शेयर में लगाया हुआ निवेश उस FII का निवेश नहीं मानते हुए सम्बंधित ग्राहक का निवेश माना जाता है.
सहभागी नोट (Participatory notes – P Notes) के धारक को सम्बंधित शेयर से मिलने वाले सभी लाभ, जैसे – लाभांश, पूँजी प्राप्ति और अन्य भुगतान, प्राप्त होते हैं. FII समय-समय पर SEBI को यह बतलाते हैं कि उन्होंने कितने सहभागी नोट निर्गत किये हैं परन्तु उन्हें अपने ग्राहक का नाम बताने की आवश्यकता नहीं होती.
सरकार और SEBI क्यों चिंतित है?
सहभागी नोटों (P-Notes) के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें कारोबार बिना किसी के नाम से होता है जिससे इस बात की प्रबल संभावना रहती है कि समृद्ध भारतीय कंपनियों के मालिक इसका उपयोग काले धन को सफ़ेद करने में तथा विदेश में स्थित अपने धन को वापस लाकर शेयर के दामों में हेरा-फेरी करने में कर सकते हैं.
एशियाई खेल :-
इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेम्बैंग में एशियाई खेलों का 18वाँ संस्करण आयोजित किया जा रहा है.
मुख्य तथ्य:
- पहली बार वीडियो गेम को भी प्रतिस्पर्धा का रूप दिया गया है. इसे eSports नाम दिया गया है.
- Canoe Polo खेल को प्रदर्शन खेल के रूप में खेलों की सूची में शामिल किया गया है.
ईंधन की प्रकृति को संकेतित करने के लिए रंगीन स्टिकर का प्रयोग :-
- सर्वोच्च न्यायालय ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को वाहनों पर होलोग्राम आधारित रंगीन स्टीकर के उपयोग करने संबंधित प्रस्ताव को सहमति प्रदान कर दी है.
- प्रायोगिक तौर पर इन स्टीकरों का प्रयोग अभी केवल दिल्ली-NCR में किया जाएगा.
- सुप्रीम कोर्ट से सहमति प्राप्त होने के बाद दिल्ली भारत का प्रथम शहर बन जाएगा जहाँ ईंधन की प्रकृति को संकेतित करने के लिए होलोग्राम आधारित रंगीन स्टीकर प्रणाली को अपनाया जायेगा.
- ज्ञातव्य है कि इस प्रणाली के तहत पेट्रोल और CNG संचालित वाहनों के लिए हल्के नीले रंग का और डीजल वाहनों हेतु हल्के नारंगी रंग का प्रयोग किया जाएगा.
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